प्रदेश में पशुपालन विभाग की पृथक रूप में स्थापना वर्ष 1944 में की गई थी।
वर्तमान में प्रदेश की ग्रमीण अर्थव्यवस्था को और सुदृढ़ करने से विभागीय कार्यक्रमों को स्वरोजगार के मध्यम से जोड़कर कृषि के साथ पशुपालन वृहत्तर योगदान कर रहा है। जो देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 9 प्रतिशत है।
पशुधन विकास के चार प्रमुख आयामों उन्नत पशु प्रजनन, पशु स्वास्थ्य, पशु पोषण् के क्षेत्र में समग्र प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्ष 2007 की पशुगणना के अनुसार उ.प्र. में कुल पशुओं की संख्या 602.72 लाख थी तथा इस संदर्भ में देश में इसका प्रथम स्थान था।
वर्ष 207 की पशुगणना के अनुसार उ.प्र. में कुल गोवंशीय पशुओं की संख्या 188.83 लाख थी तथा इस संदर्भ में इसका देश में तीसरा स्थान (मध्य प्रदेश एवं प. बंगाल के बाद) था।
वर्ष 2007 की पशुगणना के अनुसार उ.प्र. में महिषवंशीय पशुओं की कुल संख्या 238.12 लाख थी तथा इस संदर्भ में इसका देश में प्रथम स्थान था।
वर्ष 2007 की पशुगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में बकरियों की संख्या 147.93 लाख (राजस्थान एवं प. बंगाल के बाद देश में तृतीय स्थान) तथा सुअरों की संख्या 19.87 लाख (असम के बाद द्वितीय स्थान) थी। देश में उ.प्र. का दग्ध उत्पादन में प्रथम स्थान है।
उ.प्र. में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 333 ग्राम प्रतिदिन है।
वर्ष 2009-10 में उ.प्र. में कुल दुग्ध उत्पादन 20203 लाख रहा है।
सकल अंडा उत्पादन में देश में प्रदेश आठवें स्थान पर है। यहां प्रति पक्षी अंडा उत्पादन 188.8 है।
वर्ष 2009-10 में उ.प्र. में कुल 1523 हजार किग्रा. ऊन का उत्पादन किया गया।
उ.प्र. मांस उत्पादन एवं निर्यात में भी देश में प्रथम स्थान पर है।
वर्तमान में विषय विशेषज्ञों द्वारा पशुआंे की विशेष चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने हेतु तीन पशु चिकित्सा पाॅलीक्लीनिक क्रमशः गोरखपुर, मुजफ्फरनगर तथा लखनऊ में कार्यरत हैं। इनके माध्यम से रेडियोलाॅजिस्ट, सर्जन एवं गाइनेकोलाॅजिस्ट द्वारा विशेष रोग निदान सेवाएं आधुनिक उपकरणों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इटावा के सैफाई में पाॅलीक्लीकि के भवन का निर्माण पूर्ण हो गया है, तथा जनपद बागपत के बड़ौत में पाॅलीक्लीनिक के भवन का निर्माण कार्य 85 प्रतिशत तक हो गया है। प्
ाशुओं के रोग-निदान तथा बीमारियों की खोज हेतु एक कंेद्रीय प्रयोगशाला(लखनऊ) निदेशालय स्तर पर तथा 10 मंडलीय प्रयोगशालाएं मंडल स्तर पर कार्यरत हैं।
वर्ष 2008-09 तक वाराणसी , फैजाबाद, बरेली, मुरादाबाद, इलाहाबाद, आगरा, मेरठ, झांसी एवं कानपुर में मंडलीय प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण किया जा चुका था।
राष्ट्रीय कृषि आयोग की संस्तुति के आधार पर प्रत्येक 5000 पशुओं पर एक पशु सेवा केंद्र की स्थापना की जानी थी।
सीमित संसाधनों के कारण उत्तर प्रदेश में अद्यतन स्थिति के अनुसार प्रत्येक 21,000 पशु संख्या पर एक पशु चिकित्सालय कार्यरत था।
पशु चिकित्सा एवं रोगों की रोकथाम हेतु निरंतर सेवाएं 2200 पशु चिकित्सालयों, 268 द श्रेणी औषधालयों, 2575 पशु सेवा केंद्रों तथा 29 सचल पशु चिकित्सालयों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रदेश के प्रत्येक विकास खंड में पशु चिकित्सालय तथा पशु सेवा कंेद्र उपलब्ध हैं।